पाप की दुनियां

मौत अब ज़िंदगी से बेहतर लगती, हर सुबह एक सज़ा सी लगती। उम्मीदें राख हो चुकी हैं अंदर, पाप की दुनिया है—अब जीवन का मंजर।

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लेखक : Erica
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