तुम मेरी हो(स्वैच्छिक)

न कोई दावा, न कोई शर्त हो, बस तेरा नाम, और तुझसे मोहब्बत हो। जी लूँगा हर दर्द, हर खोई खुशी को, अगर तू ये कह दे — तुम बस मेरे हो।

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कविता

: rani
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