वो पागल थी

“वो पागल थी” एक कोमल, रोमांटिक कविता है जो उस एक लड़की की कहानी कहती है, जिसकी मासूम दीवानगी में सच्चा प्यार छुपा है। उसकी दुनिया अल्हड़ है, ख्वाबों से भरी हुई, लेकिन उसकी भावनाएँ बेहद गहरी और सच्ची हैं। वह प्रेम को ऐसे जीती है जैसे वह उसका अस्तित्व हो — बिना शर्त, बिना तर्क, सिर्फ एहसासों की धुन पर। यह कविता दिल को छूती है, और हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी, 'पागलपन' ही सबसे सच्चा प्यार होता है।

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: विजय सांगा
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