मजदूर

इस कविता "मजदूर" में मेहनतकश मजदूरों के जीवन, संघर्ष और उनके अतुलनीय योगदान को सरल हिंदी में भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह रचना उन गुमनाम नायकों को समर्पित है, जो अपने श्रम से देश की नींव को मजबूत करते हैं, लेकिन स्वयं अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। कविता उनके आत्मबल, समर्पण और समाज के प्रति उनकी अहम भूमिका को सम्मानपूर्वक रेखांकित करती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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