पसीने से धरती सींचें, सूरज संग रोज़ ही खींचें। ना कोई नाम अख़बारों में, ना कोई सम्मान दीवारों में।
1. मज़दूर 18 | 15 | 16 | 5 | | 02-05-2025 |
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