हमने लहू पसीना एक किया तब जाकर कहीं अन्न उगा, तुम महलों में चैन से सोए हम झोपड़ियों में पलकें भिगोए।
1. मज़दूर 17 | 15 | 15 | 5 | | 02-05-2025 |
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