उलझन

“उलझन” एक भावनात्मक कविता है जो जीवन की उन जटिल परिस्थितियों को दर्शाती है, जब इंसान अपने ही विचारों, संबंधों और फैसलों के बीच उलझ जाता है। यह कविता मन के द्वंद्व, रिश्तों की दूरी और आत्मसंघर्ष को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। साथ ही यह यह भी संकेत देती है कि यही उलझनें हमें आगे बढ़ने की राह दिखाती हैं।

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: विजय सांगा
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