एक दर्द सी लड़की

मुझे अपने दर्द को पन्नों में उतरना है मुझे आखिर कब तक हर चीज सही करू यही सवाल है खुद का खुद से अगर तुम पढ़ो मेरे दर्द को समझो मुझे मैं हूँ या नहीं हूँ ये ना पूछो दर्द को समझना है तुम्हें मेरा होना एक बोझ है यही हर किसी ने समझाया मुझे फिर मैं हर पल हंसने कोशिश करूँगी अगर तुमने पढ़ा मेरी तकलीफों तो मेरा दर्द समझो न कि कोई कहानी समझना है तो जरूर मैं हर पल खराब मिजाज की नहीं थी इतना तो तुमने समझना होगा मुझे लिखना नहीं था दर्द को मुझे पर कोई था ही नहीं सुने को मुझे ज़रा समझो तो समझना मुझे लिखू तो दर्द की किताब लिख सकती हूँ पर समझो मुझे तो दर्द समझना लेना मेरे किसी दिल पर बोझ रख कर लिखा है आज 🙂 मैंने

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: Gayri
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