"अधूरी दुनिया" "रात के तीसरे पहर...जब पूरा शहर सो रहा था, एक आवाज़ गूंज उठी — अनदेखी, अनसुनी... 'वापस आओ...' विहार मल्होत्रा — एक साधारण फोटोग्राफर, जिसकी जिंदगी एक रात में बदल गई।सपनों में दिखती वो लड़की, वो दरवाज़े, वो परछाइयाँ — क्या ये महज़ एक भ्रम था? या कोई अनकहा सच? सात दरवाज़े। एक शापित दुनिया। एक अनंत प्रेम। और एक युद्ध — अंधेरे और रौशनी के बीच। हर कदम पर एक रहस्य, हर मोड़ पर एक धोखा। और समय के उस पार, उसका इंतज़ार करती थी —अधूरी दुनिया। क्या विहार समय के धागों को चीर करअपने अतीत और अपनी अधूरी मोहब्बत को बचा पाएगा?या ये कहानी भी बाकी रह जाएगी... अधूरी...? अधूरी दुनिया एक ऐसी यात्रा, जो आपकी रूह तक उतर जाएगी।
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