बचपन की दोस्ती

यह कविता बचपन की दोस्ती की निश्छलता और मासूमियत को याद करती है। कवि उन दिनों को याद करता है जब छोटी-छोटी चीज़ों में अपार खुशी मिलती थी — जैसे मिट्टी में खेलना, फटी पतंगों के पीछे भागना, और कागज़ की नावें बहाना। तब ना कोई भेदभाव था, ना लालच, बस सच्ची दोस्ती और बिना शर्त प्यार था। जैसे-जैसे बड़े हुए, वो प्यारी मासूमियत खो गई, और अब बचपन की वो दोस्ती केवल यादों और तस्वीरों में ही रह गई है। कवि उन बीते हुए पलों को फिर से जीने की इच्छा जताता है।

19 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
कविता

: Wishcard Sangeeta
img