रात के सन्नाटे में, घड़ी की सुइयां दो बजा रही थीं। हल्की-हल्की ठंडी हवा बह रही थी, और चाँद बादलों के पीछे छिपा हुआ था। उसी गहरी रात में, मीरा और अगनीव अपने दो महीने के मासूम बेटे शिवा को लेकर एक सुनसान जगह पर पहुँचे। चारों ओर अंधेरा पसरा हुआ था, और दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था। आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने अपने ही खून को इस अनजान शहर में अकेला छोड़ दिया? मीरा की आँखों में आँसू थे, और उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। अगनीव का चेहरा भावशून्य था, लेकिन उसके भीतर एक भयंकर जंग चल रही थी। क्या यह कोई मजबूरी थी? क्या कोई ऐसा राज़ था, जिसे वे किसी से छिपा रहे थे? जानने के लिए पढिए, "Shiva : Vinash Ka Mahayudh"
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