अपने पराए

शहर की चकाचौंध में रिश्ते अक्सर खो जाते हैं, लेकिन कुछ दिल के रिश्ते हर दूरी को मिटा देते हैं। “अपने पराए” एक बुजुर्ग महिला और एक युवा पड़ोसी की संवेदनशील कहानी है, जो दिखाती है कि खून का रिश्ता ज़रूरी नहीं, जो साथ निभाए, वही सच्चा अपना होता है।

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: विजय सांगा
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