अंशी की आँखों में एक अजीब सी गहराई थी, जैसे किसी रहस्य की झील हो। उसके चेहरे पर भाव कम और मौन ज़्यादा था। वो किसी से बात नहीं करती थी। ना कोई मुस्कान, ना कोई प्रतिक्रिया। स्कूल में दो साल से थी, लेकिन आज तक किसी ने उसकी आवाज़ नहीं सुनी थी। उसके कमरे की दीवारें फीकी गुलाबी थीं। खिड़की से चाँदनी भीतर बिखर रही थी। अंशी बिस्तर पर लेटी थी, लेकिन उसकी आँखों में नींद नहीं थी। तभी अचानक, उसकी बंद आँखों के पीछे एक दृश्य उभरा। एक गोलाकार मंदिर... पुरानी ईंटों से बनी संरचना, जिसके चारों तरफ कुछ मंत्र खुदे थे। हवा में धुआँ था, नीले और बैंगनी रंग का, और उस धुएँ के बीच एक चेहरा उभरा। गहरी आँखें, माथे पर स्वर्णिम चिह्न और होंठ हिलते हुए। आखिर कौन था उस धुंध में? क्या अंशी कभी बोलेगी? जानने के लिए पढ़िए, "Maun Sutra"
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