प्रकृति के नियम

शहर से आया एक महत्वाकांक्षी युवक जब हिमालय की गोद में बसे शांत गाँव नेरांग में आधुनिकता का स्वाद लाना चाहता है, तो वह अनजाने में प्रकृति के संतुलन को छेड़ बैठता है। लेकिन जब पहाड़ खामोश नहीं रहते, तो वह एक ऐसी सच्चाई से रूबरू होता है जो न सिर्फ उसकी सोच बदलती है, बल्कि उसकी आत्मा को भी पुनर्जीवित कर देती है। यह कहानी है सौंदर्य, लोभ, चेतावनी और अंततः आत्मबोध की—जहाँ प्रकृति सिखाती है कि उसके नियम अमर हैं, और उनका उल्लंघन नहीं, केवल सम्मान ही जीवन को संभव बनाता है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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