पतझड़ एक सच

यह कविता एक पेड़ के माध्यम से जीवन के उतार-चढ़ाव और अकेलेपन की भावना को व्यक्त करती है। जब पेड़ पर पत्ते होते हैं, वह सुंदर और मनमोहक लगता है, छाया देता है और उसका साथ पत्तों से निखरता है। लेकिन पतझड़ का मौसम आते ही पत्ते एक-एक करके झड़ने लगते हैं, जिससे पेड़ सूना और अकेला हो जाता है। यह स्थिति जीवन के उस दौर की तरह है जब अपने छूट जाते हैं और अकेलापन घेर लेता है। अंत में, कविता एक गहरी सच्चाई बताती है कि समय किसी का नहीं होता — एक दिन सबको जाना होता है, और जीवन का अंत भी अवश्यंभावी

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लेखक : King
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