कविता की समरी: "बदलता मौसम" एक सुंदर और भावनात्मक कविता है जो प्रकृति के बदलाव और किसान की आशाओं को दर्शाती है। इसमें बिन मौसम की बरसात का वर्णन है, जो किसान के लिए खुशियाँ लेकर आती है। जैसे-जैसे काले बादल अंबर में छाते हैं, किसान की उम्मीदें जागती हैं। रिमझिम बारिश के साथ उनके चेहरे पर मुस्कान लौटती है और घर-आंगन भीगने के साथ-साथ उनका मन भी भीग जाता है। यह बरसात न सिर्फ ज़मीन को सींचती है, बल्कि बांध की समस्या का समाधान और हरियाली भी साथ लाती है। अंत में, यह कविता इस बात की आशा जगाती है कि अब जब बरसात बीत चुकी है, तो एक सुहानी ऋतु आने वाली है।
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