गर्मी के दिन (बचपन वाले)

“गर्मी की छुट्टियाँ सिर्फ मौसम नहीं होतीं, वो एक एहसास होती हैं। नानी के आँगन की मिट्टी, तालाब की छपाक, आम के बाग़ की मिठास और दादी की कहानियों की महक। ये कहानी उन बीते हुए दिनों की है, जब वक़्त धीमा चलता था, दिल बेफिक्र होता था और रिश्तों की डोरें बिना इंटरनेट के सबसे मजबूत होती थीं। गर्मी के दिन (बचपन वाले) कहानी, आपको ले जाएगी उस गाँव में जहाँ सूरज तपता था पर दिल कभी नहीं जलता था। एक यात्रा, स्मृतियों के पलों में लौट जाने की, जहाँ हर पाठक अपना बचपन ढूँढ़ पाएगा।”

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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