भानगढ़ का नाम सुनते ही रूह तक काँप उठती है। उसकी रहस्यमयी कहानियाँ, वीरान खंडहर, और सदियों से चली आ रही डरावनी मान्यताएँ हमेशा से मेरे दिल को बेहद रोमांचित करती आई हैं। मुझे बचपन से ही रहस्यों में दिलचस्पी रही है, और जब मैंने भानगढ़ के बारे में पढ़ा, सुना और महसूस किया—तो मन में यही ख्याल आया कि क्यों न इस रहस्यमयी किले की पृष्ठभूमि पर एक कल्पनात्मक कहानी तैयार की जाए। यह कहानी पूरी तरह मेरी कल्पना पर आधारित है, लेकिन इसमें आपको भानगढ़ की डरावनी, रहस्यमयी और रहस्य से भरी आत्मा की झलक ज़रूर मिलेगी। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसा सफर है जो आपको अतीत और वर्तमान के बीच झूलती एक अनोखी दुनिया में ले जाएगा। मुझे उम्मीद है कि यह कल्पनिक रचना आप सभी को बेहद पसंद आएगी। कृपया पढ़ने के बाद अपनी राय ज़रूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाएं मुझे और बेहतर लिखने की प्रेरणा देती हैं। चलिए कहानी शुरू करते हैं — घना जंगल। चारों ओर सिर्फ पेड़ों की सरसराहट और जानवरों की रह-रह कर आती आवाजें। हर तरफ अजीब-सी खामोशी थी। बस उसके पैरों के नीचे सूखे पत्तों की आवाजें गूंज रही थीं... “चर्क... चर्क... च्रर्र…” हर कदम पर पत्तों का चिथड़ा-सा टुकड़ा उड़ता, और उसकी भारी साड़ी की किनारी उन पत्तों में उलझ जाती। उसके तन पर गाढ़े लाल रंग की एक शाही साड़ी थी, जिसकी चमक अब धुंध और मिट्टी में दब चुकी थी। उसकी चाल में घबराहट थी, सांसें तेज़, और माथे पर बहता पसीना लहू में घुल चुका था। गले, हाथों और पैरों में लदे हुए भारी सोने के गहने बेमेल सी आवाज़ कर रहे थे— ‘ठन... ठन... झनन…’ पर वो भाग रही थी — तेज़, बेखौफ नहीं, बेबस थी। उसका चेहरा पूरा खून से लथपथ था, पहचान मिट चुकी थी... आँखों में कुछ देखने की नहीं, कुछ याद रखने की कोशिश झलक रही थी। और तभी... घने पेड़ों के बीचोंबीच सामने एक झील आ गई — इतनी शांत, इतनी साफ़, कि जैसे खुद एक आईना हो। वो ठिठक गई, साँसे थाम लीं और झुककर झील में चेहरा देखने लगी... उस लड़की ने उस झील के पानी से अपना मुंह धोया और उसने सोचा कि शायद अब सब ठीक है.... लेकिन तभी पीछे से एक साया उसकी ओर बढ़ा काले कपड़े, लंबा शरीर, और चेहरे पर घना साया उसकी लाल आंखें... अंधेरे में बस आंखें ही दिख रही थी— लाल, जलती हुई। वो साया जैसे हवा में तैरता हुआ आ रहा था, काले कपड़े, लंबा कद, और चेहरे पर एक घना साया। उसकी आँखों की लाल चमक... जलती हुई, लहूलुहान, जैसे अंधेरे में उसकी आँखें ही जिंदा थीं। हर कदम की आवाज़, जैसे आसमान में बिजली कड़क रही हो। जमीन कांप रही थी, और तेज हवाओं की आवाज़ सुनाई दे रही थी— "हू... हू... हू..."। वो स्त्री घबरा गई। उसका शरीर जैसे किसी जादू से ठहरा था। उसके पैर वहीं बर्फ की तरह जम गए थे, और डर से उसका कंठ सूख चुका था। वो भागने की कोशिश नहीं कर पा रही थी, जैसे कोई शक्ति उसे जकड़ कर खींच रही हो। और तब, उस साए ने अपना कदम आगे बढ़ाया और उसके पास पहुँचते हुए... उसके हाथों में एक तेज़, श्वेत तलवार थी, जो खून से सनी हुई थी। तलवार की धार में मानो मौत छिपी हुई हो, और खून की कुछ बूंदें नीचे गिरती जा रही थीं, जैसे किसी निर्दोष का खून अब भी उस तलवार में समा चुका हो। वो स्त्री जैसे ही तलवार को देखती है, उसके तन में एक सिहरन दौड़ जाती है। वो वही तलवार थी... जिससे उसने और उसके परिवार ने तड़पते हुए अपनी जान गंवाई थी। उसके प्रियतम की जान भी शायद उसी तलवार के साथ खत्म हो चुकी थी। आँखों में आंसू थे, और गला रुंधा हुआ था। वो अघोरी उसकी तरफ देखता हुआ हंसता है। हंसी इतनी खौफनाक थी कि जंगल की सभी जंगली जानवर, पक्षी, सब इधर-उधर भागने लगते हैं। सारी धरती उस हंसी से थरथरा रही थी। वो अघोरी उसके और करीब आता है, और फिर उसकी देह को ललचाई नजरों से निहारता हुआ कहता है— “ठीक है, मैं तुझे छोड़ दूँगा, लेकिन मुझे तुझे सौंपना होगा... खुद को, मेरे सामने! यही यहाँ, इसी जंगल में। फिर जो तुम कहोगी, वही मैं करूंगा। तुम चाहो तो तुम्हारे पूरे राजपरिवार को जीवित कर दूँगा। क्या बोलती हो?” वो स्त्री कांपते हुए जवाब देती है, “तुम झूठ बोल रहे हो! तुम अघोरी होकर ऐसी नीचता कर रहे हो, झूठ बोल रहे हो कि मेरे परिवार को जिंदा कर दोगे...।” अघोरी हंसी में बहरा हो जाता है, और फिर कहता है— “तुझे नहीं पता... अघोरी की शक्ति कितनी खतरनाक होती है... रुक, मैं तुझे दिखाता हूँ!” और फिर एक पल में उसने अपनी शक्ति से एक हिरण को तुरंत मार दिया। हिरण तड़पता हुआ गिर पड़ा और मरा हुआ दिखने लगा। वो स्त्री दंग रह जाती है और अघोरी हंसते हुए कहता है— “देखा, मैंने इसे कैसे मार दिया! अब ये देख, मैं तेरे पूरे राजपरिवार को जीवित कर सकता हूं, अगर तू मुझे अपना सब कुछ सौंप देती है।” राजकुमारी की आँखों में आंसू थे, क्योंकि वो अपने परिवार को खोने के बाद भी आशा की एक किरण देख रही थी। लेकिन तभी... अघोरी का हाथ और पास आता है, और वो अपनी तलवार से उसकी चूनरी का एक हिस्सा खींचने ही वाला था... तभी, एक तेज़ झटका हुआ। तलवार अघोरी के हाथ से गिर पड़ी। वो तलवार... राजकुमार युवान की थी! राजकुमार ने तलवार से अघोरी पर वार किया था। अघोरी का चेहरा खून से लाल हो गया। वह बहुत गुस्से में था, और अपनी शक्ति से जैसे शैतान बन गया। वह बिना किसी चेतावनी के राजकुमार के सीने में खंजर घुसा देता है। राजकुमार युवान एक जोर की चीख मारता है, और वही जमीन पर गिर जाता है। " राजकुमार युवाननननन !! " — राजकुमारी की चीख जैसे आसमान फाड़ देती है। वो दौड़ कर राजकुमार के पास जाती है, घुटनों के बल गिर पड़ती है और उसके सिर को अपने कांपते हाथों से उठाकर अपनी गोद में रख लेती है। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, और आँखों से आँसू बरसात की तरह बह रहे थे। “नहीं... नहीं राजकुमार .... युवान! आप ऐसे नहीं जा सकते... उठिए ! उठिए ना ... वो बार-बार उसका चेहरा थपथपा रही थी, लेकिन युवान की आँखें बंद हो चुकी थीं। उसके होंठों पर वो प्यारी मुस्कान अब सदा के लिए थम गई थी। “आपने मुझसे वादा किया था कि आप कभी मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे फिर क्यूं .... क्यूं चले गए आप मुझे छोड़कर ?” वो सिसक-सिसककर रोने लगी। उसका चेहरा अब आँसुओं में भीग चुका था, और शरीर कांप रहा था। “इस जन्म में हम नहीं मिल पाए, पर एक वादा है तुमसे... अगले जन्म में हम जरूर मिलेंगे... जन्म-जन्मांतर तक... तुम्हारी प्रिया सिर्फ तुम्हारी रहेगी, युवान...” वो अपना माथा युवान के सीने पर रखकर वहीं बैठ गई, जैसे उस धड़कन को दोबारा महसूस करना चाहती हो। लेकिन... तभी... पीछे से अघोरी की काली परछाईं फिर से पास आ जाती है। उसके चेहरे पर वो ही राक्षसी मुस्कान, और हाथ में खून से भरा वही खंजर। राजकुमारी कुछ समझ पाती, इससे पहले ही— “छ्च्चाक्!!” एक तेज़ वार उसकी कमर के नीचे, पेट के बीचोंबीच कर दिया जाता है। एक चीख... इतनी तेज , इतनी करुण, कि पूरा जंगल उस आवाज़ से कांप जाता है। “आआआह...!!!” यहां तक अच्छा लगा हो तो प्लीज फॉलो करके एक अच्छा सा कमेंट कर दें। 🙏🏻
© Copyright 2023 All Rights Reserved