कभी-कभी नफ़रत, मोहब्बत से ज़्यादा गहराई रखती है… खासकर तब जब दिल अब किसी पर ऐतबार करना छोड़ दे।” --- सर्द सुबह की हवा में एक अजीब सी सख़्ती घुली थी।
1. CHAPTER 1: "Nafrat Ka Pehla Safa" 4 | 1 | 1 | 5 | | 15-04-2025 |
2. Chapter 2 - izzat ki kimat 1 | 0 | 0 | 0 | | 20-04-2025 |
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