कभी-कभी नफ़रत, मोहब्बत से ज़्यादा गहराई रखती है… खासकर तब जब दिल अब किसी पर ऐतबार करना छोड़ दे।” --- सर्द सुबह की हवा में एक अजीब सी सख़्ती घुली थी।
1. CHAPTER 1: "Nafrat Ka Pehla Safa" 26 | 18 | 19 | 5 | | 15-04-2025 |
© Copyright 2023 All Rights Reserved