लफ्जों की कहानी

लफ्जों की कहानी लफ्जों की कहानी की बात है निराली, जब से मिली हूं इससे हो गई हूं दीवानी। खासियतें इसकी इतनी, मैं क्या क्या बताऊं..! आओ और लिखो पढ़ो इस पे, इसकी खूबियों को जान जाओ। लिखना था ख्वाब मेरा, जिसे यहां आ कर मिली उड़ान। लिखते लिखते मेरी बन गई पहचान। प्रतियोगिता भी जीती, इनाम भी है पाया। फिर दिल ने लफ्जों की कहानी का गुण गया। यहां की टीम तो है लाजवाब, जो अगले ही मिनट करती है, आपकी सारी समस्या का समाधान। बीरा जी विशाल जी की जोड़ी, है बहुत कमाल, जो हर कदम पर रखती है हमारा ही खयाल। विशाल जी का हृदय है बहुत विशाल, बीरा मैम है बेहद खुशमिजाज, उनके कंधों पर ही है सारा दारोमदार। यत्न से है सब की उलझने सुलझाती, कभी किसी बात पर कभी नहीं हैं झल्लाती। खासियतें है इतनी क्या क्या मैं गिनाऊं, इसको गिनाते गिनाते कहीं मै ना थक जाऊ। ।। समाप्त।।

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दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
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