मुजरिम

एक बिज़नेसमैन की बेरहमी से हत्या, दीवार पर खून से लिखा "मैं मुजरिम हूं", और एक पुलिस अफसर जो सच की तह तक जाने की कसम खा चुका है। लेकिन जब हर शक़ एक चेहरा दिखाता है और असलियत दूसरा, तब क्या इंसाफ़ आसान होता है? "मुजरिम" एक सस्पेंस और इमोशन से भरी कहानी है, जहां हर किरदार अपने भीतर एक रहस्य छुपाए बैठा है।

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: विजय सांगा
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