टूटा हुआ ख़्वाब

यह कविता एक ऐसे सपने की कहानी है जो प्यार, उम्मीद और विश्वास से बना था, लेकिन वक्त और सच्चाई के थपेड़ों में टूट गया। यह ख्वाब किसी अपने से जुड़ा था, जो कभी बहुत करीबी और सच्चा लगता था। कविता में उस सपने के बनने, उसके साथ बिताए गए पल, फिर उसके बिखरने और अंत में उस दर्द की गहराई को खूबसूरती से बयान किया गया है। कविता यह भी दर्शाती है कि टूटे ख्वाब सिर्फ याद नहीं होते, बल्कि वे हर रोज़ नए रूप में फिर से जन्म लेते हैं, और इंसान फिर से उन्हें जीने की कोशिश करता है — चाहे वो फिर से टूटने ही क्यों न आएं। यह कविता उम्मीद और दर्द का संगम है, जहाँ टूटे ख्वाबों की चुभन के साथ-साथ फिर से सपने देखने की हिम्मत भी है।

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