काश

यह कविता एक व्यक्ति की कल्पनाओं और इच्छाओं को दर्शाती है, जो अपने मन की उड़ान भरते हुए एक पंछी बन जाना चाहता है। वह ज़िंदगी की उलझनों और ग़मों से दूर, खुले आसमान में आज़ादी से उड़ना चाहता है। सरल भाषा में लिखी गई यह कविता, सपनों, शांति और आत्मिक स्वतंत्रता की गहराई को छूती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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