शाम चुकी थी, लेकिन ज़मीन पर कीचड़ अब भी बाकी था। गाँव के कोने में एक टूटी-सी झोंपड़ी के सामने बैठी छोटी सी लड़की, गीली मिट्टी से सने अपने पैरों को देख रही थी। उसका नाम था श्यामा।
1. "एक अछूत नहीं, उम्मीद की लौ" 13 | 11 | 12 | 5 | | 07-04-2025 |
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