यह कहानी आरुषि नाम की एक 17 साल की लड़की की है, जिसे उसके ही पिता के दुश्मन ने नशे की हालत में अपना शिकार बना लिया। समाज की 'इज्जत' बचाने के नाम पर उसकी शादी उसी दरिंदे से कर दी जाती है, बिना उसकी मर्ज़ी पूछे। शारीरिक और मानसिक पीड़ा से जूझती आरुषि जब जानती है कि उसका बच्चा भी अब इस दुनिया में नहीं रहा, तो उसकी दुनिया पूरी तरह टूट जाती है। यह कहानी एक मासूम की चुप्पी, उसके दर्द, अन्याय और अंततः आत्मबल की भावुक यात्रा है — जो समाज को आईना दिखाती है।
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