यह कविता एक दलित युवक शंभू की कहानी है, जो समाज के तिरस्कार और भेदभाव के बावजूद शिक्षा के बल पर आगे बढ़ता है। पहले अध्याय में उसका संघर्ष दिखाया गया है, वहीं दूसरे अध्याय में उसकी माँ की मौत जातिवादी सोच के कारण हो जाती है, जो समाज की सड़ी हुई मानसिकता को उजागर करती है। अंत में शंभू समाज को बदलने का बीड़ा उठाता है और समानता व इंसानियत का संदेश देता है। यह कविता जात-पात की कुरीति पर करारा प्रहार करती है और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा देती है।
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