यह कहानी जंगल और इंसान की नैतिकता के टकराव को दिखाती है। जब कुछ शिकारी अपनी हवस के लिए जंगल में जानवरों का शिकार करने निकलते हैं, तो उनका सामना न सिर्फ जंगल की असली ताकत से होता है, बल्कि उन्हें यह भी एहसास होता है कि असली हिंसा और क्रूरता तो इंसान के भीतर ही छुपी है। यह एक भावनात्मक, रोमांचक और सोचने पर मजबूर कर देने वाली कहानी है, जो इंसानियत और हैवानियत के बीच की धुंधली रेखा को उजागर करती है।
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