अत्याचार या विकास

“अत्याचार या विकास” एक संवेदनशील और सशक्त कहानी है एक साधारण किसान रामबली की, जो अपने गाँव की उजड़ी ज़मीन, टूटे सपनों और खोती पहचान के बीच विकास की सच्चाई को चुनौती देता है। यह कहानी बताती है कि जब विकास इंसानियत को कुचलने लगे, तो वह विकास नहीं, एक नया अत्याचार बन जाता है। न्याय, संघर्ष और उम्मीद से भरी यह कथा हर उस आवाज़ को सलाम करती है जो चुप नहीं रहती।

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: विजय सांगा
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