तस्वीर

यह कविता एक पुरानी तस्वीर की कहानी बयां करती है, जो वर्षों से दीवार पर टंगी हुई बीते लम्हों को संजोए रखती है। यह तस्वीर न सिर्फ एक मुस्कान को कैद किए हुए है, बल्कि उसमें छिपी यादें, खुशियां, ग़म और बीते समय की झलकियां भी समेटे हुए है। वक्त भले ही बदल जाए, लेकिन तस्वीर अतीत की भावनाओं को संजोकर रखने का एक जरिया बनी रहती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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