आजादी

यह कविता भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष और बलिदानों को समर्पित है। इसमें उन वीर सपूतों की गाथा गाई गई है जिन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर देश को आज़ाद कराया। कविता स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, संघर्ष और बलिदान को याद दिलाती है और हमें यह संदेश देती है कि केवल आजादी पाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे संजोकर रखना और देश को आगे बढ़ाना भी हमारा कर्तव्य है। यह कविता हर भारतीय को अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का अहसास कराती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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