बिशन दास जी अपने बेटे, बहू और पोते के साथ रहते थे, लेकिन भीतर से गहरे अकेले थे। एक रात, उन्होंने सबको खुश रहने की सलाह दी और अगली सुबह अपने कमरे में मृत पाए गए। उनकी डायरी से पता चला कि वे अपनी दिवंगत पत्नी को याद करते हुए अकेलेपन से जूझ रहे थे। परिवार को एहसास हुआ कि वे साथ रहकर भी उनके दर्द को नहीं समझ सके। उनकी आखिरी इच्छा थी कि उनका परिवार दुखी न रहे, और विवेक ने इसे पूरा करने का वादा किया।
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