नाजुक मन

कोमल मन कविता भावनाओं की नाज़ुकता और गहराई को दर्शाती है। यह एक संवेदनशील हृदय की कोमलता को उजागर करती है, जो प्रेम, दर्द, खुशी और दुःख को आसानी से आत्मसात कर लेता है। कविता में मन को कली, जलधारा और कांच के दिल की तरह चित्रित किया गया है, जो छोटी-छोटी बातों से खिल उठता है और ज़रा-सी ठेस से टूट भी सकता है। यह मन की मासूमियत और उसकी संवेदनशीलता को उभारते हुए यह संदेश देती है कि हमें इसे ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए, बल्कि इसकी कोमलता को समझना और सहेजना चाहिए।

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