समीक्षा

मैं समीक्षा हूं। मैं अपनी अस्तित्व की समीक्षा करती हूं। मैं समीक्षा करती हूं और इसी समीक्षा ने मेरी जीवन की रूप रेखा बदल दी, आज मैं मौत के इतने करीब पहुंच गई हूं कि मौत भी मुझे जिंदगी से अच्छी लगने लगी है और इसके सही मायने भी समझ में आए हैं। समीक्षा ने किसकी अस्तित्व की समीक्षा की जानने के जरूर पढ़े मेरी कहानी" समीक्षा" सिर्फ लफ्जों की कहानी पर।

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KALPANA MANTHAN PRATIYOGITA ~ 1 ( STORY )

: Juli barnwal
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