पैसे का दर्द

"पैसे का दर्द" एक ऐसी कविता है जो पैसे के महत्व, उसकी चमक-दमक और उसके पीछे छिपे दर्द को उजागर करती है। यह कविता दर्शाती है कि पैसा केवल एक जरिया है, लेकिन लोग इसे ही अपनी जिंदगी की मंज़िल मान लेते हैं। पैसे की चाहत में रिश्ते टूट जाते हैं, इंसान भटक जाता है और फिर भी सुकून नहीं मिलता। यह कविता हमें सिखाती है कि पैसा कमाना जरूरी है, लेकिन उसका अंधा पीछा करना हमें भावनात्मक और मानसिक रूप से खोखला कर सकता है।

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: विजय सांगा
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