अनकही उदासी

अनकही उदासी क्यों आज दिल है बेचैन, क्यों आंखों से छलकता पानी है। क्यों दिल धड़कता है तेरे नाम से क्यों आस पास मेरे अनकही उदासी है। तेरा रहना ही सब कुछ हुआ करता था कभी, क्यों अब ये सिर्फ एक फर्ज अदायगी है। तुम पास हो या दूर हो, क्यों महसूस नहीं होता तेरा वजूद। तेरे रहने के बाद भी, क्यों मेरे पास तन्हाई है। क्यों दिल धड़कता है तेरे नाम से, क्यों अनकही उदासी है। पास रह कर भी दूर क्यों हम है, एक दूसरे से अनहदा से है। क्यों फिकर है पर प्यार नहीं है, क्यों साथ है पर संग नहीं हैं। क्यों पास है पर करीब नहीं है,

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दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
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