दहलीज़

सर्द हवा का एक झोंका आया और आयरा के चेहरे पर बिखरी लटों को उलझा गया। उसने सामने खड़ी पुरानी हवेली को देखा। अंधेरे में डूबी हुई, वक्त की मार खाई हुई, मगर फिर भी जैसे उसे अपनी ओर खींच रही थी।

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: Naaz
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