बिछड़ना बिछड़ जाता है जब कोई अपना, पास रह जाता है बस उसका सपना। दिल से कैसे उसकी याद मिटाए, कैसे उसके बिन रह पाएं। उससे ही था जीवन में रंग, सारी खुशियां थी उसके संग। उसके जाते ही चैन गया, यादों यादों में रैन गया। जब बिछड़ना था उस निर्मोही को, क्यों मुझ पगले संग नेह बंध किया। दिया प्यार किया खुद को निसार, मुझ पर दिया खुद को वार। रोम रोम में मेरे बस के, लहू की तरह रगों में बह के।
© Copyright 2023 All Rights Reserved