चूड़ी वाला

और उसी दिवाली कि शाम रत्ना धीरज को अपने गांव आकर पता चलता है कि हमारे कारण सच्चे और अच्छे इंसान रोशन चूड़ी वाले की जान चली गई तो उन्हें इस बात का बहुत अफसोस होता है कि हमने अनजाने में जो पाप किया है यह हमें जीवन भर दुख देगा हमने अनजाने में अब क्या अतीत की कितनी दुखद याद बना ली। इसलिए मनुष्य को जाने अनजाने में वर्तमान में ऐसे कर्म करने चाहिए जिससे कि उसके अतीत की यादें खूबसूरत बने जिसके सहारे वह अपना जीवन खुशी से जिए।

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: Rakesh
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