यह कविता वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के साहस, शक्ति और बलिदान को दर्शाती है। इसमें बताया गया है कि कैसे बचपन में ही मनु (लक्ष्मीबाई) ने वीरता के गुण अपनाए और बड़े होकर अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष किया। युद्ध के दौरान उन्होंने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर शत्रुओं से लोहा लिया और अंत तक पराजय स्वीकार नहीं की। उनका जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित रहा, और उनकी गाथा हमेशा अमर रहेगी। कविता रानी लक्ष्मीबाई की अमर वीरता और बलिदान की गौरवगाथा को उजागर करती है।
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