खोने का भय

"खोने का भय" कविता में इंसान के अंदर अपनों को खोने का डर और उससे उपजी भावनाओं को व्यक्त किया गया है। यह डर रिश्तों की गहराई को भी दर्शाता है, जहाँ व्यक्ति अपने प्रियजनों को दूर जाता देख व्याकुल हो उठता है। कविता इस चिंता को बयां करती है कि यदि अपने छूट गए तो जीवन कैसा होगा। अंत में, यह संदेश मिलता है कि इसी खोने के भय में ही प्रेम और रिश्तों की असली अहमियत छुपी होती है।

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