मन की बात

यह कविता "मन की बात" हमारे भीतर चलने वाली उन अनकही भावनाओं और विचारों को व्यक्त करती है, जो अक्सर शब्दों में ढल नहीं पाते। मन में दबी भावनाएँ, अधूरे सपने, बीते पलों की यादें और अनकही बातें हमारे भीतर एक हलचल पैदा करती हैं। कभी हम चाहते हैं कि कोई हमें बिना कहे समझ ले, तो कभी हमें अपने मन की बातें कहने के लिए कागज़ और कलम का सहारा लेना पड़ता है। यह कविता मन की इसी उलझन और उसकी अभिव्यक्ति की सुंदरता को दर्शाती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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