अन्नदाता किशान

किसान अपनी मेहनत और त्याग से धरती को सींचता है, अन्न उगाता है और सबका पेट भरता है। वह हर मौसम की मार सहता है, फिर भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता। अपनी जरूरतों से पहले वह देश की भूख मिटाने की सोचता है, लेकिन उसकी मेहनत की सही कीमत उसे नहीं मिलती। फिर भी, वह हर बार नई उम्मीद के साथ खेतों को संवारता है, क्योंकि वही तो धरती का सच्चा अन्नदाता है।

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