गुल्लक बचपन वाला

यह कविता बचपन की गुल्लक से जुड़ी मीठी यादों को संजोती है। कैसे छोटे-छोटे सिक्के जमा करके बच्चे अपने सपने बुनते हैं और हर खनक में खुशी ढूंढते हैं। गुल्लक सिर्फ बचत का साधन नहीं, बल्कि मासूम इच्छाओं और अपनों के दिए हुए प्यार का प्रतीक होती है। जब गुल्लक टूटती है, तो बचपन की यादें भी बिखर जाती हैं, लेकिन उनके मीठे एहसास जीवनभर हमारे साथ रहते हैं।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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