कहां गए वो दिन

माँ की दी पाई में खुशियाँ थी, पापा के सिक्के में दुनिया बसी। चाट-पकौड़ी, खिलौने, कहानियाँ, हर ख्वाहिश गुलक में ही फँसी।

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दैनिक प्रतियोगिता

: Rakesh
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