"ख़ामोशियों की आवाज़" कविता उन अनकहे जज़्बातों को बयां करती है जो शब्दों में ढल नहीं पाते। यह दर्शाती है कि ख़ामोशी भी अपनी एक आवाज़ रखती है, जिसे सिर्फ़ वो सुन सकता है जो दिल से महसूस करे। कविता बताती है कि दर्द, मोहब्बत, तन्हाई और यादें—सब कुछ ख़ामोशियों में छिपा होता है। हवा, रातें और चाँद भी इस मौन को समझते हैं, क्योंकि हर चुप्पी के पीछे एक गहरी दास्तान होती है। अंत में, यह कविता उन लोगों को समर्पित है जो बिना कहे भी बहुत कुछ कह जाते हैं।
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