तुम्हे याद तो है ना

यह कविता बचपन की मीठी यादों को संजोए हुए है, जहाँ नन्हे कदमों की मासूमियत, दोस्तों की शरारतें, और परिवार की गर्मजोशी थी। इसमें बचपन के वे अनमोल पल उकेरे गए हैं, जो समय के साथ कहीं खो गए हैं, पर दिल के किसी कोने में आज भी जीवंत हैं। यह कविता पाठकों को अपने बीते दिनों की याद दिलाती है और उन सुनहरे लम्हों को फिर से जीने का अहसास कराती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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