कभी हँसाए, कभी रुलाए, कभी धूप तो कभी छाँव दिखाए। नसीब की इस अजब कहानी, कभी सुनहरी, कभी बेगानी।
1. नसीब 17 | 15 | 15 | 5 | | 24-02-2025 |
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