बदलते लोग

कविता विवरण: यह कविता समाज और रिश्तों की सच्चाई को दर्शाती है। समय के साथ लोग और उनके व्यवहार कैसे बदल जाते हैं, इसे सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। बचपन की दोस्ती, रिश्तों की गहराई और भरोसे का टूटना, ये सभी बातें हमें जीवन में कभी न कभी महसूस होती हैं। यह कविता उन्हीं अनुभवों को शब्दों में पिरोने का एक प्रयास है, जो हमें सिखाता है कि हर रिश्ता सच्चा नहीं होता, और जीवन में आगे बढ़ते रहना ही सबसे बेहतर रास्ता है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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