वक्त के साथ लोग बदल जाते हैं, रिश्तों की गहराई खोने लगती है। जो कभी अपने थे, वही अजनबी बन जाते हैं। स्वार्थ और परिस्थितियाँ रिश्तों पर हावी हो जाती हैं, और साथ निभाने के वादे बस शब्दों तक सिमट जाते हैं। यही दुनिया का दस्तूर है—जो सच्चा होता है, वही ठहरता है, बाकी सब वक्त के साथ बह जाते हैं।
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